एक तरफ जहाँ उर्दू को तहज़ीब और तमीज की भाषा बताई जाती है और पाकिस्तान की तो मातृभाषा ही उर्दू है, ऐसे जगह पर सिर्फ चंद पैसों की खातिर वहां की मीडिया सरे-आम फैला रही है फूहड़ता।

पाकिस्तानी मीडिया अक्सर राजनीतिज्ञ मुद्दों पर झूठे फैक्ट्स पेश करते आई है और वहां की आवाम को गलत बयानबाजियों से गुमराह करते आना तो उनके लिए आम बात है, लेकिन इन सबसे बाद भी इनका दिल नहीं भरा।
पाकिस्तानी मीडिया का एक और रूप हम रख रहें हैं आपके सामने। कहतें हैं साहित्य समाज का आइना होता है, तो जरा देखिये तो पाकिस्तान का मीडिया अपनी किस शक्ल को पेश कर रहा है? क्या आता है वहां के टेलीविज़न चैनल्स पर… जिसे लोग अपने परिवार वालों के साथ भी बैठ कर देखतें होंगें….
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