
हमारी भारतीय संस्कृति में देवर भाभी का रिस्ता अत्यंत ही मर्यादित होता है और भाभी को माँ का दर्जा दिया जाता है. यही कारण है कि भाभी भी अपने देवर को बेटे जैसा प्यार देती है।
लेकिन जब अपने भाई के न होने पर जब देवर बुरे रास्ते पर चलना सीख जाये तो भला भाभी कर ही क्या सकती हैं. सिर्फ और सिर्फ अपने पति से उसकी शिकायत, लेकिन जब बात फिर भी न बने तो थक हारकर बेचारी भाभी को ये सहारा भी लेना पड़ सकता है.
हमारा आज का यह विडियो आपको बताएगा कि भाभी और देवर का रिस्ता आखिर क्यों बदनाम होता है और इसमे सिर्फ सोच की की साकारात्मकता दिखाई जाये तो इसे बदनाम होने से बचाया जा सकता है.
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