
थायराइड शरीर मे पाए जाने वाले एंडोक्राइन ग्लैंड में से एक है। थायरायड ग्रंथि गर्दन में श्वास नली के ऊपर एवं स्वर यन्त्र के दोनों ओर दो भागों में बनी होती है। इसका आकार तितली जैसा होता है। थायराइड ग्रंथि थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है जिससे शरीर के ऊर्जा क्षय, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन के प्रति होने वाली संवेदनशीलता नियंत्रित होती है। इस लेख को पढ़ें और थायराइड ग्रंथि के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें।

क्या और कैसे करती है थायराइड ग्रंथि कार्य
थायराइड एक छोटी सी ग्रंथि होती है जो तितली के आकार होती है और गर्दन के निचले हिस्से के बीच में होती है। यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रण करती है यानी जो भोजन हम खाते हैं यह उसे उर्जा में बदलने का काम करती है। इसके अलावा यह हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों व कोलेस्ट्रोल को भी प्रभावित करती है। दूसरे शब्दों में इसका काम शरीर के उपापचय (मेटाबोलिज्म) को नियंत्रित करना होता है। मेटाबोलिज़्म को नियंत्रित करने के लिए थायराइड हार्मोन बनाता है, जो शरीर की कोशिकाओं को यह बताता है कि कितनी उर्जा का उपयोग करना है। यदि थायराइड सही तरीके से काम करे, तो शरीर के मेटाबोलिज़म के कार्य के लिए आवश्यक हार्मोन की सही मात्रा बनी रहती है। जैसे-जैसे हार्मोन का उपयोग होता रहता है, थायराइड उसमें बदलाव करता रहता है। थायराइड ग्रंथि रक्त की धारा में हार्मोन की मात्रा को पिट्यूटरी ग्रंथि को संचालित करके नियंत्रित करती है। जब मस्तिष्क के नीचे खोपड़ी के बीच में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि को यह पता चलता है कि थायराइड ग्रंथि हार्मोन की कमी हुई है या उसकी मात्रा अधिक है तो वह अपने हार्मोन (टीएसएच) को समायोजित करता है और थायराइड ग्रंथि को बताता है कि अब क्या करना है।
थायराइड एक छोटी सी ग्रंथि होती है जो तितली के आकार होती है और गर्दन के निचले हिस्से के बीच में होती है। यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रण करती है यानी जो भोजन हम खाते हैं यह उसे उर्जा में बदलने का काम करती है। इसके अलावा यह हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों व कोलेस्ट्रोल को भी प्रभावित करती है। दूसरे शब्दों में इसका काम शरीर के उपापचय (मेटाबोलिज्म) को नियंत्रित करना होता है। मेटाबोलिज़्म को नियंत्रित करने के लिए थायराइड हार्मोन बनाता है, जो शरीर की कोशिकाओं को यह बताता है कि कितनी उर्जा का उपयोग करना है। यदि थायराइड सही तरीके से काम करे, तो शरीर के मेटाबोलिज़म के कार्य के लिए आवश्यक हार्मोन की सही मात्रा बनी रहती है। जैसे-जैसे हार्मोन का उपयोग होता रहता है, थायराइड उसमें बदलाव करता रहता है। थायराइड ग्रंथि रक्त की धारा में हार्मोन की मात्रा को पिट्यूटरी ग्रंथि को संचालित करके नियंत्रित करती है। जब मस्तिष्क के नीचे खोपड़ी के बीच में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि को यह पता चलता है कि थायराइड ग्रंथि हार्मोन की कमी हुई है या उसकी मात्रा अधिक है तो वह अपने हार्मोन (टीएसएच) को समायोजित करता है और थायराइड ग्रंथि को बताता है कि अब क्या करना है।
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