
गर्भावस्था की शुरुआत गर्भधारण करने से होती है जो पुरुष के वीर्य की कोशिका के स्त्री के कोशिका में मिलने और उसे उर्वर बनाने से होता है। यह प्रक्रिया महिला के गर्भनाल में शुरू होती है और फिर भ्रूण की स्थापना गर्भाशय में होती है।यह वहा 9 महीने तक रहकर नए जीवन की रचना करता है।
जिन दम्पत्तियों को बच्चों की कामना हो उन्हें महिला के उर्वर काल में सम्भोग करना चाहिए। गर्भधारण के लिए एक दिन निश्चित करना काफी कठिन काम है। हर महीने अण्डोत्सर्ग के बाद यह उर्वर दशा 6 दिनों तक रहती है जिसके बाद महिलाओं का अण्डोत्सर्ग होता है। यह एक 6 दिन का कालखण्ड होता है क्योंकि एक शुक्राणु 6 दिन तक ज़िंदा रह सकता हैज बकि अंडा जिस दिन छोड़ा जाता हैं उसके एक दिन तक ही ज़िंदा बचता है।
महिलाएं गर्भधारण को लेकर हमेशा चिंता में रहती हैं। यह अण्डोत्सर्ग के समय पर निर्भर करता है। जब एक महिला अण्डोत्सर्ग कर रही होती है तो उसे वही समय गर्भधारण के लिए श्रेष्ठ समय मान लेना चाहिए। पर कई कम अनुभवी महिलाएं अण्डोत्सर्ग का समय नहीं समझ पाती हैं।
अण्डोत्सर्ग के होने का समय
अण्डोत्सर्ग का समय, अण्डोत्सर्ग मासिक धर्म चक्र एवं मासिक धर्म की लम्बाई पर निर्भर करता है। एक आम महिला को अण्डोत्सर्ग के 12 से 14 दिन बाद मासिक धर्म होता है। यह मासिक धर्म छोटा होकर 22 दिन का भी हो सकता है या फिर ये बढ़कर 36 दिन का भी हो सकता है। आम 28 दिनों के मासिक धर्म की अवस्था में अण्डोत्सर्ग मासिक धर्म समाप्त होने के 14 दिन बाद होता है। लम्बे मासिक धर्म चक्र की स्थिति में अण्डोत्सर्ग ज़्यादा समय लेता है। हर महिला में मासिक धर्म 7 दिनों तक अलग होता है और इसी बीच एक महिला उर्वर होती है। गर्भधारण के लिए हर मासिक धर्म में 2 से 3 बार सम्भोग करना चाहिए। हर 2 से 3 दिन में सम्भोग करने से वीर्य अच्छा होगा।
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