
1 से 2 साल के बच्चे अपने खाने की आदत को शिशुपन से छोड़कर अपने माँ-बाप की तरह बनाना शुरू करते है। वे अपने हाथो से खाने की आदत को सीखते है और फिर जब वे 15 से 18 महीने के होते है तब अपनी थाल से खुद खाना सीखना पसंद करते है।
एक साल के बालक का भोजन, बच्चे साल में 3 से 5 इंच तक ही बढ़ पाते है। और इनकी इस उम्र में बहुत से बदलाव होते है, जैसे की भोजन व्यवहार को सिखने से लेकर अनेक प्रकारों के खान पान के स्वाद तक। माता – पिता यहाँ पर एक महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व निभाते है, जो अपने बच्चों को बोतल से पिलाने की आदत को दूर करते है और दूसरे आहार जो बच्चों के सेहत के लिए अच्छे हो उस से परिचय कराते है। स्तन के दूध से बहुत से पोषण उपलब्ध होते है, लेकिन अब यह सही समय है की अपने बच्चों को आप वास्तविक खाने का स्वाद कराए।

उनकी साइज़ और उम्र के अनुसार आपको इनके खाने की प्रक्रिया इस तरह निभानी चाहिए जिस से बच्चों को दिन में 1000 से 1400 तक की कैलोरी प्राप्त हो। माता- पिता को प्रयास करना चाहिए कि वो अपने बच्चों को रोज़ अनेक प्रकार के पोषण दे। अगर आप एक दिन इसका प्रयोग करना भूल जाए तो चिंतित ना होए क्योंकि आपके पास बहुत से मौके है जिसमे आप उस पोषण की कमी की पूर्ति कर सकते है। डॉक्टर के परामर्श की भी आवश्यकता अनिवार्य है क्योंकि वे आपके बच्चे के सेहत अनुसार खान- पान का निर्णय करते है।
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