
ज्यादा खाओगे तो मोटे हो जाओगे, यह एक ऐसा बात है जिसे सुनने के बाद बहुत से लोग अपनी प्लेट से आधा खाना दूसरे की प्लेट में डाल देते हैं या फिर भले ही उन्हें कितनी ही भूख क्यों ना लगी हो वो यही कहते नज़र आते हैं कि मैं बिल्कुल नहीं खा सकता। और हो भी क्यों न वे मोटे जो हो जाते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दबा कर सब कुछ खाते हैं, और फिर भी मोटे नहीं होते! लेकिन भला क्यों? चलिये आज जानने का कोशिश करते हैं कि भला कैसे कैसे कुछ लोग बहुत सारे खाने के बावजूद नहीं होते मोटे?

सामान्यतः वयस्क कामकाजी पुरूषों को न्यूनतम 2500 कैलोरीज़ व वयस्क महिलाओं को 2000 कैलोरीज़ की जरूरत होती है। आराम से व अपेक्षाकृत निष्क्रिय जीवन बताने वाले लोगों में यह उनकी कुल कैलोरी की दैनिक आवश्यकता का 60-80 प्रतिशत के बराबर होता है। हमें अपनी दैनिक गतिविधियों के लिए भी कुछ कैलोरीज़ की जरूरत पड़ती है। अगर हमारी दैनिक भोजन से कैलोरीज़ की आपूर्ति इन सब (आहार प्रेरित थमोजिनेसिस, रेस्टिंग मेटाबॉलिक रेट और रोज़मर्रा के कार्यों के लिए आवश्यक कैलोरी) आवश्यकताओं से अधिक है तो ये अधिक मात्रा में ली गई कैलोरीज़ का फैट के रूप में शरीर में जमा हो जाती है।
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